डीडवाना में सोमवार को विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू (डीएनटी) समाज का उग्र प्रदर्शन देखने को मिला। अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पर जुटे समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट के बाहर मुख्यमंत्री का पुतला फूंका। इन मांगों में शिक्षा, नौकरियों और राजनीति में 10 प्रतिशत अलग से आरक्षण शामिल है। राष्ट्रीय पशुपालक संघ और डीएनटी समाज के बैनर तले यह आंदोलन एक महापंचायत के रूप में शुरू हुआ, जो बाद में एक विशाल रैली में तब्दील हो गई।

प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के बाहर पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स पर चढ़कर अपना विरोध दर्ज कराया। यह पूरा आंदोलन स्थानीय पशु प्रदर्शनी मेला मैदान में आयोजित एक महापंचायत से शुरू हुआ था। महापंचायत को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय पशुपालक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह राइका ने कहा कि डीएनटी समाज पिछले दो वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि समाधान निकालने के बजाय आंदोलनकारियों पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।

डीएनटी समाज की प्रमुख मांगें

आरक्षण में 10% हिस्सेदारी की मांग

लाल सिंह राइका ने स्पष्ट किया कि डीएनटी समाज की मुख्य मांग आरक्षण के भीतर 10 प्रतिशत अलग से हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि अब तक समाज को आरक्षण का लाभ ठीक से नहीं मिला है। राइका ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो 1 जुलाई को जयपुर में एक विशाल महा-पड़ाव डाला जाएगा। यह सरकार के लिए एक स्पष्ट अल्टीमेटम है।

अन्य वर्गों का भी मिला समर्थन

राइका ने यह भी बताया कि अब इस आंदोलन में वंचित ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के लोग भी शामिल हो गए हैं। इससे आंदोलन को और अधिक बल मिला है। विभिन्न वक्ताओं ने आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण लागू करने की मांग उठाई। उन्होंने 'दोस्त प्लस मॉडल' के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक आरक्षण का लाभ पहुंचाने की वकालत की। यह सुनिश्चित करेगा कि समाज के सबसे जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ पहुंचे।

कलेक्ट्रेट पर तनावपूर्ण स्थिति

महापंचायत के बाद, समाज के लोग एक विशाल रैली के रूप में जिला कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुए। हाथों में झंडे और तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कलेक्ट्रेट के बाहर भारी सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग की थी। जैसे ही रैली कलेक्ट्रेट पहुंची, आक्रोशित प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स पर चढ़ गए और आगे बढ़ने का प्रयास करने लगे। लगभग 15 से 20 मिनट तक मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

मुख्यमंत्री का पुतला दहन

सरकार के खिलाफ नारेबाजी

इस दौरान, प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का पुतला फूंका। यह घटना सरकार के प्रति उनके गुस्से और निराशा को दर्शाती है। बाद में, लाल सिंह राइका के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम 11 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा। इस ज्ञापन में समाज की सभी प्रमुख मांगों का विस्तार से उल्लेख किया गया है।

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डीएनटी समाज की चुनौतियां

विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू (डीएनटी) समुदाय ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहा है। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक अवसरों तक पहुंचने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस समाज की आबादी प्रदेश में लाखों में है, लेकिन उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सरकारी योजनाओं में उचित स्थान नहीं मिला है। उनकी मांगें इसी अभाव की पूर्ति के लिए हैं।

भविष्य की रणनीति

जयपुर में होने वाले महा-पड़ाव की घोषणा ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। देखना होगा कि सरकार डीएनटी समाज की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है। यदि सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं लेती है, तो जयपुर में होने वाला यह पड़ाव राजस्थान की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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निष्कर्ष

डीडवाना में डीएनटी समाज का प्रदर्शन उनकी वर्षों की उपेक्षा और मांगों को सामने लाता है। 11 सूत्रीय मांगों को लेकर जयपुर में महा-पड़ाव की चेतावनी ने राजस्थान सरकार के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। सरकार के जवाब पर इस आंदोलन का भविष्य निर्भर करेगा। डीएनटी समाज की आरक्षण में 10% हिस्सेदारी की मांग एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

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