जयपुर। पंचायत और निकाय चुनाव में देरी को लेकर दायर अवमानना याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। राज्य निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट में जवाब पेश करते हुए बिना शर्त माफी मांग ली है। आयोग ने कहा कि अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना नहीं की गई और कोर्ट के प्रति पूरा सम्मान है।

यह मामला पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज्य निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद पंचायत और निकाय चुनावों में देरी की। जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।

आयोग की ओर से पेश किए गए जवाब में कहा गया है कि उनका कभी भी कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने का इरादा नहीं रहा। वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पंचायत व निकाय चुनाव मामले में हाइकोर्ट की खंडपीठ पहले ही 31 जुलाई तक चुनाव करवाने का फैसला सुना चुकी है, इसलिए अब यह याचिका निष्प्रभावी हो गई है। हाईकोर्ट ने इस स्वीकार कर लिया है।

हाईकोर्ट में आयोग का पक्ष

आयोग ने अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी कानून का पालन करने वाला जिम्मेदार अधिकारी है और उसे अदालत तथा कानून की सर्वोच्चता पर पूरा सम्मान है। जवाब में यह भी कहा गया कि अधिकारी ने कभी ऐसा कोई कदम नहीं उठाया और न ही जानबूझकर उठाएगा, जिससे हाईकोर्ट या किसी अन्य अदालत के आदेशों का उल्लंघन हो।

आयोग ने अदालत से यह भी निवेदन किया कि यदि अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि अधिकारी से ऐसा कोई कार्य हुआ है, जो अदालत के निर्देशों के अनुरूप नहीं था, तो उसे क्षमा किया जाए। अधिकारी ने दोहराया कि उनकी ओर से किसी प्रकार की जानबूझकर अवमानना नहीं की गई है।

क्या था मामला?

गौरतलब है कि इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह को अवमानना नोटिस जारी किए थे। अदालत ने आयोग से पूछा था कि हाईकोर्ट द्वारा तय समय सीमा के बावजूद निकाय चुनाव के लिए मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम देरी से क्यों जारी किया गया।

चुनाव टालने की मांग खारिज

इस बीच, पिछले शुक्रवार को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग की ओर से चुनाव टालने की मांग खारिज कर दी थी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव 31 जुलाई तक हर हाल में पूरे कराने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने यह भी साफ कहा था कि संवैधानिक संस्थाओं के चुनाव अनिश्चितकाल तक टाले नहीं जा सकते।

चुनाव की तारीखें और आयोग की भूमिका

राज्य निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी निष्पक्ष और समय पर चुनाव कराना है। पंचायत और निकाय चुनाव, जो स्थानीय स्वशासन की रीढ़ हैं, उनका समय पर होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब चुनाव प्रक्रिया में देरी होती है, तो यह सीधे तौर पर संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन हो सकता है। इसी संदर्भ में, आयोग द्वारा मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में की गई देरी पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था।

आगे क्या?

अब जबकि हाईकोर्ट ने चुनाव 31 जुलाई तक पूरे कराने के निर्देश दिए हैं और राज्य निर्वाचन आयोग ने बिना शर्त माफी मांग ली है, यह उम्मीद की जा रही है कि आयोग चुनाव प्रक्रिया को गति देगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोग आगामी दिनों में मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनाव की अन्य तैयारियों को कैसे पूरा करता है। इस मामले में अदालत का रुख स्पष्ट है कि संवैधानिक संस्थाओं के चुनाव में अनावश्यक विलंब स्वीकार्य नहीं है।

निष्कर्ष

पंचायत-निकाय चुनाव अवमानना मामले में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा हाईकोर्ट से बिना शर्त माफी मांगना, इस बात का संकेत है कि आयोग अब अदालती आदेशों का पालन करने के प्रति गंभीर है। हाईकोर्ट द्वारा तय समय सीमा में चुनाव संपन्न कराने के निर्देश के बाद, आयोग पर अब तेजी से कार्य करने का दबाव होगा।