आजादी का अमृत महोत्सव मनाते हुए देश को सात दशक से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन आज भी राजस्थान के कई सुदूर इलाके ऐसे हैं जो बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। इसी कड़ी में बारां जिले के ईसाटोरी गांव का मामला सामने आया है, जो विकास के दावों की पोल खोलता नजर आता है। हाल ही में यहां एक किसान की गेहूं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली खराब सड़क के कारण पलट गई, जिसने स्थानीय लोगों के वर्षों पुराने दर्द को एक बार फिर ताजा कर दिया है।
बदहाल रास्तों का दंश झेल रहे ग्रामीण
ईसाटोरी गांव में हुई यह घटना कोई पहली नहीं है, बल्कि यह यहां के निवासियों की रोजमर्रा की जिंदगी का एक हिस्सा बन चुकी है। जिस वक्त यह हादसा हुआ, किसान अपनी फसल मंडी तक पहुंचाने की जद्दोजहद में था। गांव की कच्ची और जर्जर सड़क पर गड्ढों की भरमार है। बारिश के मौसम में यह रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है और सामान्य दिनों में धूल और बड़े-बड़े पत्थरों के कारण यहां से गुजरना किसी जोखिम भरे सफर से कम नहीं है।
ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से किसान को न केवल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, बल्कि उसकी मेहनत भी मिट्टी में मिल गई। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह घटना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। क्या हमें किसी बड़े हादसे का इंतजार है, तब जाकर इन रास्तों की सुध ली जाएगी? ग्रामीण लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज फाइलों के ढेर में कहीं दबकर रह गई है।
विकास की मुख्यधारा से क्यों कटा ईसाटोरी?
सवाल यह उठता है कि आखिर ईसाटोरी जैसे गांव विकास की मुख्यधारा से क्यों कटे हुए हैं? गांव में पक्की सड़क न होना केवल आवागमन की समस्या नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों को भी प्रभावित करती है। जब गांव का संपर्क मुख्य सड़क से बेहतर नहीं होता, तो आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस का समय पर पहुंचना भी दूभर हो जाता है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को अपनी समस्या से अवगत कराया है, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं। राजनीति के गलियारों में विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थितियां जस की तस बनी हुई हैं। सड़क निर्माण के लिए बजट पास होने या सर्वे होने की बातें तो अक्सर सुनने को मिलती हैं, मगर हकीकत में सड़क का निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं हो सका है।
जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल
किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए आधारभूत ढांचा यानी सड़कें सबसे पहली जरूरत होती हैं। यदि किसान अपनी उपज को बाजार तक नहीं ले जा पाएगा, तो वह आर्थिक रूप से कैसे समृद्ध होगा? ईसाटोरी के किसान अपनी फसल को बेचने के लिए मजबूरन खराब रास्तों से गुजरते हैं, जहां अक्सर हादसे होते रहते हैं। यह सिर्फ सड़क का मामला नहीं है, यह शासन की संवेदनशीलता का मामला है।
स्थानीय प्रशासन को अब इस मामले को गंभीरता से लेना होगा। सड़क के निर्माण में देरी होने के पीछे क्या कारण हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। अगर तकनीकी अड़चनें हैं, तो उन्हें दूर किया जाना चाहिए और अगर प्रशासनिक लापरवाही है, तो जवाबदेही तय होनी चाहिए। बारां के ग्रामीण अब और अधिक इंतजार करने की स्थिति में नहीं हैं। वे चाहते हैं कि उनके गांव को एक पक्की सड़क मिले, ताकि उनका जीवन सुगम हो सके और उन्हें हर कदम पर जोखिम न उठाना पड़े।
निष्कर्ष
ईसाटोरी में हुई ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने की घटना एक चेतावनी है। यह हमें याद दिलाती है कि विकास का मतलब केवल शहरों का विस्तार नहीं, बल्कि गांव की अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति की सुविधाओं का ख्याल रखना भी है। जब तक ईसाटोरी जैसे गांवों में सड़कें नहीं बनेंगी, तब तक 'विकसित राजस्थान' का सपना अधूरा ही रहेगा। उम्मीद है कि प्रशासन इस घटना को संज्ञान में लेगा और जल्द ही गांव को पक्की सड़क की सौगात मिलेगी, ताकि भविष्य में किसी किसान को अपनी मेहनत को इस तरह मिट्टी में मिलते न देखना पड़े।
