🎓 सीधा जवाब (5 अगस्त 2026): APAAR ID हर स्टूडेंट की 12 अंकों की स्थायी शैक्षणिक पहचान है — 'One Nation, One Student ID'। यह स्कूल के जरिए बनती है (माता-पिता के सहमति फॉर्म के बाद), और बनने के बाद DigiLocker में दिखती-डाउनलोड होती है। स्कूल से फॉर्म आया है तो घबराने की बात नहीं — क्या भरना है, क्या ध्यान रखना है, और नाम-गड़बड़ी का इलाज, सब नीचे।
जयपुर। राजस्थान के स्कूलों में इन दिनों बच्चों के बस्तों में एक फॉर्म घर पहुंच रहा है — APAAR ID का सहमति पत्र। ज्यादातर अभिभावकों का पहला सवाल यही है: यह है क्या, और भरना जरूरी है क्या? आसान भाषा में: जैसे बड़ों के पैसों का खाता बैंक में है, वैसे बच्चे की पढ़ाई का खाता अब डिजिटल बन रहा है — जिसमें कक्षा 1 से डिग्री तक की हर मार्कशीट, हर सर्टिफिकेट अपने-आप जुड़ता जाएगा।
APAAR ID से मिलता क्या है?
- एक स्थायी नंबर, जिंदगी भर: स्कूल बदलो, बोर्ड बदलो, राज्य बदलो — ID वही रहती है; TC-मार्कशीट के सत्यापन का झंझट घटता है।
- दस्तावेज एक जगह: मार्कशीट-सर्टिफिकेट Academic Bank of Credits (ABC) खाते में डिजिटली जुड़ते हैं — DigiLocker से कभी भी निकालिए।
- आगे के दाखिले आसान: कॉलेज एडमिशन और स्कॉलरशिप में रिकॉर्ड सीधे ID से सत्यापित हो सकता है — छात्रवृत्ति की प्रक्रिया में दस्तावेज-आपत्तियों का सबसे बड़ा कारण यही बेमेल रिकॉर्ड होते हैं।
कैसे बनती है (और घर से क्या होता है)
- स्टेप 1 — सहमति फॉर्म: स्कूल से मिला APAAR सहमति पत्र माता-पिता भरकर लौटाते हैं। यह जरूरी है क्योंकि ID बनाने में बच्चे का आधार-विवरण इस्तेमाल होता है — बिना अभिभावक की लिखित सहमति के यह नहीं हो सकता।
- स्टेप 2 — स्कूल जनरेट करता है: स्कूल छात्र के रिकॉर्ड (नाम, जन्मतिथि, आधार) से ID जनरेट करता है — राजस्थान के सरकारी स्कूलों में यह छात्र के शाला दर्पण रिकॉर्ड से जुड़ा काम है; निजी स्कूल अपने UDISE रिकॉर्ड से करते हैं।
- स्टेप 3 — डाउनलोड: बनने के बाद APAAR कार्ड DigiLocker के Issued Documents में आ जाता है; apaar.education.gov.in पर भी दिखता है। स्कूल प्रिंटेड कार्ड भी देता है।
ध्यान दें — घर बैठे 'नई' APAAR ID नहीं बनती; इंटरनेट पर 'तुरंत अपार आईडी बनाएं' वाली जो भी वेबसाइट पैसे या OTP मांगे, वह फर्जी है। घर से सिर्फ बनी हुई ID देखना-डाउनलोड करना होता है।
सबसे आम अड़चन: आधार और स्कूल रिकॉर्ड का बेमेल
| गड़बड़ी | इलाज |
|---|---|
| आधार में नाम/जन्मतिथि सही, स्कूल रिकॉर्ड में गलत | स्कूल में आवेदन देकर शाला दर्पण/रजिस्टर की एंट्री ठीक कराएं |
| स्कूल रिकॉर्ड सही, आधार में गलत | नजदीकी आधार सेंटर से आधार अपडेट कराएं (बच्चों का बायोमेट्रिक अपडेट 5 व 15 साल पर वैसे भी जरूरी है) |
| दोनों में मामूली अंतर (जैसे मात्रा/स्पेलिंग) | एक को आधार के अनुसार करा लें — APAAR मिलान आधार से ही होता है |
रिकॉर्ड मेल खाते ही स्कूल दोबारा ID जनरेट कर देता है — ज्यादातर मामले इसी एक सुधार से निपटते हैं।
अभिभावकों के मन के तीन सवाल
- क्या यह अनिवार्य है? यह सहमति-आधारित है — इसीलिए फॉर्म आता है। सहमति देने के बाद भी नियमों में उसे वापस लेने का विकल्प है।
- डेटा कहां रहता है? शिक्षा मंत्रालय के APAAR/ABC सिस्टम में — वही सिस्टम जो DigiLocker चलाता है।
- छोटे बच्चों का भी बनेगा? हां — स्कूल में नामांकित हर विद्यार्थी का बन सकता है; जितनी जल्दी बनेगा, रिकॉर्ड उतना पूरा जुड़ेगा।
पढ़ाई-लिखाई के बाकी काम के पेज: छात्रवृत्ति स्टेटस बिना लॉगिन कैसे देखें, शिविरा पंचांग — स्कूल छुट्टियों की पूरी लिस्ट और RTE एडमिशन (जहां लागू हो)।






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