धौलपुर शहर की व्यस्त ओंडेला रोड इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है, लेकिन किसी विकास कार्य के लिए नहीं, बल्कि एक खतरनाक 'मौत के जाल' के कारण। सड़क के बीचों-बीच खुला पड़ा सीवर का ढक्कन और वहां बना गहरा गड्ढा स्थानीय निवासियों और राहगीरों के लिए हर पल एक बड़ी दुर्घटना का संकेत दे रहा है। दिन के उजाले में तो लोग जैसे-तैसे बचकर निकल जाते हैं, लेकिन रात के अंधेरे में यह गड्ढा किसी के लिए भी काल साबित हो सकता है।

जानलेवा बना सड़क का बीचों-बीच खुला सीवर

ओंडेला रोड शहर के सबसे प्रमुख रास्तों में से एक है, जहां से दिनभर भारी वाहनों और आम लोगों का आवागमन बना रहता है। सड़क के ठीक बीच में खुला सीवर चैंबर न केवल यातायात में बाधा उत्पन्न कर रहा है, बल्कि वाहनों के लिए इसे पार करना एक जोखिम भरा स्टंट बन गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कई दिनों से यह स्थिति बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने इसे सुधारने की जहमत नहीं उठाई है।

सड़क पर गहरे गड्ढे के कारण दुपहिया वाहन चालक अक्सर असंतुलित होकर गिरने के कगार पर पहुंच जाते हैं। यदि कोई तेज रफ्तार वाहन अचानक इस गड्ढे के सामने आता है, तो दुर्घटना की संभावना शत-प्रतिशत बनी रहती है। धौलपुर के इस इलाके में रहने वाले निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों को फोन किया और शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन आश्वासन के अलावा उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ।

प्रशासन की लापरवाही और स्थानीय आक्रोश

यह कोई पहला मामला नहीं है जब राजस्थान के किसी शहर में बुनियादी ढांचे की कमी के कारण आम आदमी को परेशानी उठानी पड़ रही है। अक्सर देखा जाता है कि नगर परिषद या संबंधित विभाग सड़कों की मरम्मत तो कर देते हैं, लेकिन सीवर लाइनों और चैंबर्स की देखरेख को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस मामले में भी प्रशासन की उदासीनता साफ झलक रही है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह लापरवाही केवल सड़क सुरक्षा तक सीमित नहीं है। आज के समय में जब राजनीति में विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, धरातल पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? जब तक कोई मासूम अपनी जान नहीं गंवा देता, तब तक शायद ही इस गड्ढे को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाए। जनता का कहना है कि यदि तत्काल प्रभाव से इसे ठीक नहीं किया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

केवल दुर्घटना ही नहीं, बीमारियों का भी है बड़ा खतरा

इस खुले सीवर के कारण केवल वाहन चालकों को ही खतरा नहीं है, बल्कि आस-पास के वातावरण पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है। सीवर से उठने वाली दुर्गंध और गंदगी से स्थानीय लोगों का जीना दूभर हो गया है। खुले नाले और सीवर मच्छरों के पनपने का मुख्य केंद्र होते हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य मौसमी बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

इलाके के लोगों ने बताया कि शाम होते ही इस जगह के पास से गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यहां का प्रदूषण और संक्रमण का खतरा किसी बड़ी समस्या से कम नहीं है। स्वास्थ्य विभाग को भी इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि सफाई व्यवस्था की विफलता सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। जल निकासी की व्यवस्था खराब होने से जब बारिश का पानी इस गड्ढे में भरता है, तो यह पहचानना और भी मुश्किल हो जाता है कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां।

निष्कर्ष

धौलपुर की ओंडेला रोड पर स्थित यह खुला सीवर चैंबर प्रशासनिक विफलता का एक जीता-जागता उदाहरण है। नागरिकों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ करना किसी भी जिम्मेदार विभाग के लिए उचित नहीं है। एक जागरूक समाज के नाते, यह आवश्यक है कि स्थानीय प्रशासन इस समस्या का तत्काल संज्ञान ले और इसे स्थायी रूप से दुरुस्त करे। उम्मीद है कि खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागेगा और इस 'मौत के जाल' को बंद करके जनता को राहत प्रदान करेगा। सुरक्षा केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर भी दिखनी चाहिए।