झीलों की नगरी के नाम से मशहूर उदयपुर में एक बार फिर जल स्रोतों की लापरवाही से जुड़ी एक दुखद घटना सामने आई है। नयागांव क्षेत्र के संत सरोवर में नहाने गए एक 45 वर्षीय व्यक्ति की गहरे पानी में डूबने से मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद से ही स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू टीम ने तलाशी अभियान शुरू कर दिया था, लेकिन पानी की गहराई और मिट्टी के कारण शव को ढूंढने में दो दिन का लंबा समय लग गया। रविवार की सुबह जैसे ही शव बरामद हुआ, मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

कैसे हुई यह दर्दनाक घटना?

मिली जानकारी के अनुसार, मृतक व्यक्ति नियमित रूप से अपने काम-काज से समय निकालकर तालाबों या जलाशयों के पास जाता था। घटना वाले दिन वह नयागांव स्थित संत सरोवर पर नहाने के उद्देश्य से गया था। वहां पहुंचकर उसने पानी में उतरने का फैसला किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि किनारे पर पानी कम था, लेकिन तालाब के बीच में गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। संभवतः नहाते समय उसका पैर फिसल गया या वह गहरे पानी के भंवर में फंस गया।

जब वह काफी देर तक घर नहीं लौटा, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। आसपास के लोगों और परिचितों से पूछताछ करने के बाद, जब उसके संत सरोवर की ओर जाने की बात पता चली, तो मौके पर जाकर देखा गया। वहां उसके कपड़े और चप्पलें किनारे पर रखी मिलीं, जिससे स्पष्ट हो गया कि वह पानी में उतरने के बाद बाहर नहीं आया है। परिजनों ने तत्काल स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी।

दो दिनों तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन

घटना की सूचना मिलते ही अपराध और सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों को निभाते हुए पुलिस प्रशासन हरकत में आया। मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने जाल और गोताखोरों की मदद से तलाश अभियान शुरू किया। तालाब का दायरा काफी बड़ा होने और पानी में काई व कीचड़ अधिक होने के कारण रेस्क्यू टीम को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

पहले दिन की तलाशी में टीम को सफलता नहीं मिली, जिसके कारण परिजनों की चिंता बढ़ती गई। रेस्क्यू ऑपरेशन का दायरा बढ़ाया गया और आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया गया। आखिरकार, दो दिनों की कड़ी मेहनत के बाद रविवार सुबह शव को पानी से बाहर निकाला गया। पुलिस ने शव का पंचनामा भरवाकर उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल की मोर्चरी में भिजवा दिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

जल स्रोतों पर बरतें विशेष सावधानी

राजस्थान के कई जिलों की तरह उदयपुर में भी मानसून और गर्मियों के दौरान तालाबों और बांधों का जलस्तर बढ़ जाता है। प्रशासन बार-बार लोगों को चेतावनी देता है कि वे ऐसे जल स्रोतों में न नहाएं, जहां गहराई का पता न हो। विशेषकर उन तालाबों में जहां स्थानीय लोग अक्सर जाते हैं, वहां पानी के नीचे छिपी चट्टानें और कीचड़ जानलेवा साबित हो सकते हैं।

इस दुखद घटना ने एक बार फिर से सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तालाबों के किनारे चेतावनी बोर्ड लगाना और स्थानीय निवासियों को जागरूक करना बेहद आवश्यक है। अक्सर लोग तालाब की सतह को देखकर उसे सुरक्षित मान लेते हैं, लेकिन पानी के भीतर की बनावट और गहराई का अंदाजा लगाना आम आदमी के लिए संभव नहीं होता। यह घटना हमें याद दिलाती है कि जल स्रोतों के पास मनोरंजन या नहाने के लिए जाते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

प्रशासन और समाज की भूमिका

किसी भी जलाशय के पास यदि कोई व्यक्ति अकेला जा रहा है, तो उसे सावधानी बरतने की सलाह दी जानी चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में बैरिकेडिंग की व्यवस्था करे ताकि कोई भी व्यक्ति गहरे पानी तक न पहुंच सके। यह जिम्मेदारी केवल सरकार की ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की भी है कि वे अपने आसपास के जल स्रोतों के पास बच्चों और बड़ों को सावधानी बरतने के लिए प्रेरित करें।

निष्कर्ष

संत सरोवर में हुई यह मौत केवल एक हादसा नहीं है, बल्कि एक चेतावनी भी है। एक परिवार ने अपना कमाऊ सदस्य खो दिया है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। राजस्थान के विभिन्न जिलों में जलस्रोतों के पास डूबने की घटनाएं अक्सर देखने को मिलती हैं। ऐसे में जरूरी है कि हम सतर्क रहें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें। प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी करे। हम मृतक के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि परिवार को इस कठिन घड़ी में संबल प्रदान करें।