कोटा ग्रामीण पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर अपराधियों के एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो आम लोगों को ऑनलाइन ट्रेडिंग का लालच देकर और 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर ठगी कर रहा था। पुलिस की इस कार्रवाई में तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह गैंग न केवल लोगों की मेहनत की कमाई को निवेश के नाम पर हड़प रहा था, बल्कि उन्हें कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर मानसिक रूप से भी प्रताड़ित कर रहा था।

हाल के दिनों में कोटा और आसपास के क्षेत्रों में इस तरह के साइबर अपराधों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि ये आरोपी पिछले काफी समय से सक्रिय थे और उन्होंने सैकड़ों लोगों को अपना निशाना बनाया है।

कैसे काम करता था यह साइबर गैंग?

इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद शातिर और नियोजित था। ये लोग मुख्य रूप से दो तरीकों का इस्तेमाल करते थे। पहला तरीका था ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर निवेश का लालच देना। ये लोग सोशल मीडिया और फर्जी वेबसाइटों के जरिए खुद को निवेश सलाहकार के रूप में पेश करते थे। लोगों को भरोसा दिलाने के लिए ये शुरुआत में छोटा मुनाफा भी देते थे, लेकिन जैसे ही पीड़ित बड़ी रकम निवेश करता, ये लोग गायब हो जाते थे।

दूसरा और सबसे खतरनाक तरीका था 'डिजिटल अरेस्ट'। इसमें आरोपी खुद को पुलिस, सीबीआई या नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल करते थे। वे पीड़ित को डराते थे कि उनके नाम पर कोई अवैध पार्सल आया है या वे किसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शामिल हैं। डर के मारे लोग उनकी हर बात मानने को मजबूर हो जाते थे। राजस्थान में बढ़ते अपराध के मामलों पर नजर डालें तो साइबर ठगी की घटनाएं अब सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं।

'डिजिटल अरेस्ट' का डर और मनोवैज्ञानिक खेल

'डिजिटल अरेस्ट' का मतलब असल में किसी को शारीरिक रूप से गिरफ्तार करना नहीं होता, बल्कि यह एक मनोवैज्ञानिक खेल है। इसमें ठग पीड़ित को वीडियो कॉल पर घंटों तक व्यस्त रखते हैं, ताकि वह किसी और से सलाह न ले सके। इस दौरान वे पीड़ित को घर से बाहर निकलने या किसी से बात करने से मना कर देते हैं। इस बीच, वे पीड़ित के बैंक खातों की जानकारी ले लेते हैं और उनकी पूरी जमा-पूंजी को दूसरे खातों में ट्रांसफर करवा लेते हैं।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से पुलिस ने कई सिम कार्ड, मोबाइल फोन और बैंक खाते बरामद किए हैं, जिनका उपयोग वे ठगी के पैसे को खपाने के लिए करते थे। यह गिरोह अंतरराज्यीय स्तर पर फैला हुआ था और इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े होने की आशंका है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है ताकि इनके अन्य साथियों तक पहुंचा जा सके।

जनता के लिए सतर्क रहने की जरूरत

पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल पर भरोसा न करें। यदि कोई खुद को सरकारी अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करता है और डर दिखाता है, तो तुरंत सावधान हो जाएं। किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा कभी भी वीडियो कॉल पर पूछताछ या गिरफ्तारी की धमकी नहीं दी जाती है।

इसके अलावा, किसी भी अनजान ऐप को डाउनलोड करने या किसी ट्रेडिंग वेबसाइट पर पैसा लगाने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल कर लें। अगर आपके साथ कभी ऐसी कोई घटना होती है, तो घबराएं नहीं और तुरंत साइबर क्राइम के हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नजदीकी पुलिस थाने में संपर्क करें। साइबर सुरक्षा से जुड़ी अधिक जानकारी आप हमारी साइबर सुरक्षा श्रेणी में भी पढ़ सकते हैं ताकि आप और आपका परिवार सुरक्षित रह सके।

निष्कर्ष

कोटा ग्रामीण पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के लिए एक बड़ा सबक है। हालांकि, पुलिस अपना काम कर रही है, लेकिन तकनीक के इस युग में आम जनता की जागरूकता ही असली सुरक्षा है। ऑनलाइन ट्रेडिंग का लालच हो या पुलिस की वर्दी पहनकर की गई धमकी, सतर्कता ही बचाव का एकमात्र रास्ता है। अपराधियों का यह नेटवर्क भले ही टूट गया हो, लेकिन तकनीक का गलत इस्तेमाल करने वाले लोग अभी भी सक्रिय हो सकते हैं। इसलिए, डिजिटल लेनदेन करते समय हमेशा सावधानी बरतें और किसी भी संदिग्ध कॉल को नजरअंदाज न करें।