राजस्थान के चूरू जिले में उस समय हड़कंप मच गया जब जोधपुर डिस्कॉम के एक स्टोर में भीषण आग लग गई। इस घटना का प्राथमिक कारण ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन से निकली चिंगारी को माना जा रहा है। आग इतनी विकराल थी कि देखते ही देखते स्टोर में रखा बिजली का कीमती सामान और उपकरण राख के ढेर में तब्दील हो गए। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी विभागों की सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हादसे का मंजर और दमकल की मशक्कत

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। चश्मदीदों के अनुसार, हाईटेंशन लाइन में हुई स्पार्किंग के तुरंत बाद स्टोर के आसपास के इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उन्हें नियंत्रित करने में दमकल कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि, गनीमत रही कि इस दुर्घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा है।

जोधपुर डिस्कॉम का यह स्टोर बिजली आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां से क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में विद्युत उपकरणों की सप्लाई की जाती है। आग लगने के बाद पूरे इलाके में बिजली व्यवस्था ठप हो गई, जिससे आम लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता, तो यह आसपास की रिहायशी इमारतों तक भी पहुंच सकती थी, जो एक बड़ी त्रासदी का रूप ले सकती थी।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही

इस घटना के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या डिस्कॉम के स्टोर के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजरने की अनुमति कैसे दी गई? नियमानुसार, किसी भी सरकारी स्टोर या महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान के ऊपर या उसके बेहद करीब से हाईटेंशन तार नहीं गुजरने चाहिए। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इसे अपराध की श्रेणी में भी रखा जाना चाहिए क्योंकि यह जानबूझकर लोगों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान जैसे गर्मी वाले प्रदेशों में जहां तापमान अक्सर 45-50 डिग्री तक पहुंच जाता है, बिजली के तारों में स्पार्किंग की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में डिस्कॉम को अपने परिसरों के आसपास सुरक्षा ऑडिट कराना चाहिए था। क्या समय रहते इन तारों की मरम्मत या स्टोर को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने का कोई प्रयास किया गया था? फिलहाल इन सवालों के जवाब संबंधित अधिकारी देने से बच रहे हैं। इस लापरवाही के कारण न केवल सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है, बल्कि बिजली वितरण व्यवस्था भी चरमरा गई है।

बिजली वितरण तंत्र पर गहरा असर

स्टोर में लगी आग से न केवल पुराने सामान का नुकसान हुआ है, बल्कि नई बिजली लाइनों के बिछाने और ट्रांसफार्मर मरम्मत के काम में भी देरी होगी। डिस्कॉम की कार्यप्रणाली में बाधा आने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नई बिजली कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को अब और इंतजार करना पड़ सकता है। व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति अनिवार्य है, और इस प्रकार की दुर्घटनाएं पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और विकास कार्यों को प्रभावित करती हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का आरोप है कि डिस्कॉम की तरफ से नियमित रूप से उपकरणों का रखरखाव नहीं किया जाता है, जिसके कारण ऐसे हादसे बार-बार होते हैं। स्टोर में रखे मीटर, केबल और अन्य तकनीकी उपकरण पूरी तरह जलकर खाक हो चुके हैं, जिनका आकलन करने के बाद ही वास्तविक नुकसान का पता चल सकेगा।

निष्कर्ष

चूरू में हुई यह घटना एक चेतावनी है कि सरकारी महकमों को अपनी सुरक्षा नीतियों को और अधिक सख्त बनाने की आवश्यकता है। हाईटेंशन लाइनों के नीचे किसी भी प्रकार का भंडारण या निर्माण करना भविष्य में बड़ी दुर्घटनाओं को न्योता देना है। प्रशासन को चाहिए कि वह न केवल इस आग के कारणों की जांच करे, बल्कि डिस्कॉम के अन्य स्टोरों का भी 'फायर सेफ्टी ऑडिट' कराए ताकि भविष्य में किसी भी कीमती सरकारी सामान और जान-माल की हानि को रोका जा सके। जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।