हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में अक्षय तृतीया का विशेष स्थान है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाने वाली यह तिथि न केवल एक पर्व है, बल्कि इसे 'अबूझ मुहूर्त' के रूप में भी जाना जाता है। साल 2026 में अक्षय तृतीया का पर्व एक बार फिर नई उमंग और धार्मिक आस्था के साथ मनाया जाएगा। राजस्थान, विशेषकर जयपुर जैसे शहरों में इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है, जहाँ लोग इसे अपने व्यापार, नए कार्यों की शुरुआत और विवाह के लिए सबसे शुभ दिन मानते हैं।
अक्षय तृतीया 2026: राजस्थान के सभी जिलों के शुभ मुहूर्त, पूजा समय और सोना खरीदने का समय
अक्षय तृतीया 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
अक्षय का अर्थ होता है 'जिसका कभी क्षय न हो' या जो कभी समाप्त न हो। इस दिन किए गए दान, जप, तप और हवन का फल अनंत काल तक प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया के दिन सूर्य और चंद्रमा अपनी उच्च राशि में होते हैं, जो इसे अत्यंत शुभ बनाते हैं। पंडितों के अनुसार, इस दिन किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए किसी भी ज्योतिषी परामर्श या पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती, इसीलिए इसे 'अबूझ मुहूर्त' कहा गया है। आप अपनी सुविधानुसार इस दिन भूमि पूजन, गृह प्रवेश, नई संपत्ति की खरीदारी या विवाह जैसे मांगलिक कार्य कर सकते हैं।
पूजा विधि और दान का महत्व
अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदियों में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके पश्चात भगवान विष्णु को चंदन का लेप लगाएं, क्योंकि वैशाख की गर्मी में शीतलता प्रदान करना प्रभु को प्रिय है। पूजा में जौ, गेहूं, चना और सत्तू का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना गया है।
इस दिन दान का विशेष महत्व है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार अनाज, वस्त्र, सत्तू, शक्कर और पंखों का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को करना चाहिए। राजस्थान की संस्कृति में इस दिन जल दान (प्याऊ लगाना) की परंपरा सदियों पुरानी है, जो भीषण गर्मी से राहत दिलाने का एक सेवा भाव है।
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पौराणिक कथाएं और मान्यताएं
धार्मिक ग्रंथों में अक्षय तृतीया से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि इसी दिन सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। महाभारत काल में जब पांडव वनवास में थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें 'अक्षय पात्र' प्रदान किया था, जिससे उन्हें कभी भी भोजन की कमी नहीं हुई। इसके अलावा, भगवान परशुराम का प्राकट्य दिवस भी इसी तिथि को माना जाता है। वहीं, सुदामा और श्रीकृष्ण का मिलन भी अक्षय तृतीया के दिन ही हुआ था, जहाँ सुदामा ने अपनी दरिद्रता का अंत किया था। ये कथाएं हमें सिखाती हैं कि शुद्ध मन और श्रद्धा से की गई पूजा कभी निष्फल नहीं होती।
राजस्थान में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व
राजस्थान के लिए अक्षय तृतीया केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह कृषि और सामाजिक जीवन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कड़ी है। जयपुर के बाजारों में इस दिन सोने और चांदी की खरीदारी का विशेष चलन है। लोग मानते हैं कि इस दिन खरीदा गया स्वर्ण घर में बरकत लाता है। साथ ही, ग्रामीण अंचलों में किसान इस दिन से रबी की फसल के भंडारण और खरीफ की बुवाई के लिए तैयारी शुरू करते हैं। इस दिन पर्यटन स्थलों पर भी सांस्कृतिक आयोजन होते हैं, जो राज्य की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं।
निष्कर्ष
अक्षय तृतीया 2026 का अवसर हमें आध्यात्मिकता, दान-पुण्य और सकारात्मकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह दिन संकल्प लेने और किसी नई शुरुआत का है, जिसका परिणाम सदैव अक्षय रहे। हम सभी को इस दिन सादगी और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करनी चाहिए ताकि सुख और समृद्धि का वास हो।
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