चित्तौड़गढ़ के मंडफिया स्थित भगवान श्री सांवलिया सेठ का मंदिर महज एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि देश भर के करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। इस मंदिर की ख्याति केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां होने वाला दान और उसके रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े अक्सर चर्चा का केंद्र बने रहते हैं। हाल ही में जब मंदिर का दान पात्र खोला गया, तो एक बार फिर भक्तों के अटूट विश्वास और दान की महिमा ने सबको हैरान कर दिया। पहले ही चरण की गणना में 11 करोड़ 11 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई, जो यह दर्शाती है कि भक्तों का अपने आराध्य के प्रति समर्पण किस स्तर का है।

दान की अद्भुत बानगी: पहले चरण में 11 करोड़ 11 लाख

सांवलिया सेठ के दरबार में दान की प्रक्रिया कोई सामान्य गतिविधि नहीं होती, बल्कि यह एक विशाल प्रशासनिक और धार्मिक कार्य की तरह संपन्न की जाती है। कृष्णपक्ष चतुर्दशी के दिन राजभोग आरती के बाद जब मंदिर का भंडार (दान पात्र) खोला गया, तो भक्तों और मंदिर प्रशासन की उपस्थिति में गिनती का कार्य प्रारंभ हुआ। पहले चरण की गणना के समापन पर जब आंकड़े सामने आए, तो वह 11 करोड़ 11 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि थी। यह आंकड़ा केवल नकद राशि का है, जबकि सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य भेंटों की गणना का कार्य अभी शेष है। यह राशि मंदिर के दान पात्र की क्षमता और भक्तों के उत्साह को स्पष्ट रूप से बयां करती है।

चमत्कार और आस्था: 'सांवलिया सेठ' का अनूठा नाता

इस मंदिर की लोकप्रियता के पीछे कई पौराणिक मान्यताएं और चमत्कारिक इतिहास जुड़ा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, वर्ष 1840 में भादसोड़ा-भादली खेड़ा के पास खुदाई के दौरान भगवान कृष्ण की तीन मूर्तियां प्राप्त हुई थीं। इन मूर्तियों की स्थापना के बाद से ही यह क्षेत्र 'सांवलिया सेठ' के धाम के रूप में विख्यात हो गया।

यहाँ के बारे में सबसे अनूठी बात यह है कि सांवलिया सेठ को 'व्यापारियों का सेठ' माना जाता है। भक्त यहाँ केवल अपनी मनोकामनाएं पूरी करने नहीं आते, बल्कि वे अपने व्यापार और लाभ में भगवान को भी अपना 'पार्टनर' या हिस्सेदार मानते हैं। यही कारण है कि व्यापारी वर्ग, चाहे वह राजस्थान का हो या देश के अन्य हिस्सों का, अपनी कमाई का एक निश्चित हिस्सा हर्षोल्लास के साथ मंदिर में समर्पित करता है। भक्तों का मानना है कि सांवलिया सेठ के दरबार में जो भी समर्पित किया जाता है, वह कई गुना होकर वापस मिलता है।

पारदर्शिता और अनुशासन: गिनती का कठिन कार्य

इतनी बड़ी धनराशि की गणना करना एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य होता है, जिसे मंदिर मंडल ने पूरी पारदर्शिता और कड़े सुरक्षा इंतजामों के साथ संपन्न किया। इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि न हो, इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों की सीधी निगरानी रखी गई।

गणना स्थल पर चित्तौड़गढ़ की अतिरिक्त जिला कलेक्टर और मंदिर मंडल की मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रभा गौतम विशेष रूप से मौजूद रहीं। उनके साथ मंदिर बोर्ड के अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव, बोर्ड सदस्य किशनलाल अहीर, रामलाल गुर्जर, हरिराम गाडरी और पवन कुमार ने पूरी प्रक्रिया का निरीक्षण किया। सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नायब तहसीलदार व प्रशासनिक अधिकारी प्रथम शिवशंकर पारीक, प्रशासनिक अधिकारी द्वितीय व लेखाकार राजेंद्र सिंह, संपदा व गौशाला प्रभारी भेरुगिरी गोस्वामी और सुरक्षा प्रभारी गुलाब सिंह सहित कई कर्मचारी तैनात थे। क्षेत्रीय बैंकों के सहयोग से नोटों की गिनती का यह कार्य पूरी तरह व्यवस्थित तरीके से किया गया।

दान का सदुपयोग और सामाजिक सरोकार

सांवलिया सेठ मंदिर में आने वाला यह दान केवल मंदिर के सौंदर्यीकरण तक ही सीमित नहीं रहता। मंदिर मंडल इस राशि का उपयोग विभिन्न सामाजिक और धार्मिक कार्यों में करता है। मंदिर द्वारा संचालित गौशालाएं, शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयास, और निर्धन वर्ग की सहायता जैसे कार्य इस दान की सार्थकता को सिद्ध करते हैं। मंदिर के धन का उपयोग समाज के पिछड़े और जरूरतमंद तबकों तक पहुँचने वाली योजनाओं में भी किया जाता है, जिससे आम जनता का विश्वास मंदिर प्रशासन और इस धाम के प्रति और भी अधिक गहरा हो जाता है।

अगला चरण और अमावस्या का महत्व

पहले चरण की गणना के बाद, बाकी बची हुई राशि, स्वर्ण-रजत आभूषणों और भेंटकक्ष की गणना का कार्य दूसरे चरण के लिए सुरक्षित रखा गया है। मंदिर मंडल के अनुसार, यह शेष गणना अमावस्या पर आयोजित होने वाले मेले के बाद की जाएगी। अमावस्या का दिन इस मंदिर के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ते हैं। मेले की भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने गणना के कार्य को दो भागों में विभाजित करने का निर्णय लिया है, ताकि कोई भी चूक न हो।

निष्कर्ष

चित्तौड़गढ़ स्थित श्री सांवलिया सेठ मंदिर का यह घटनाक्रम केवल आंकड़ों की बाजीगरी नहीं है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की अटूट आस्था का प्रमाण है। 11 करोड़ 11 लाख रुपये का यह आंकड़ा मंदिर के प्रति लोगों के विश्वास और निष्ठा को प्रतिध्वनित करता है। सांवलिया सेठ का यह धाम आज न केवल धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बन चुका है, बल्कि अपनी पारदर्शी कार्यप्रणाली और समाज सेवा के कार्यों के कारण भी एक मिसाल पेश कर रहा है। आने वाले समय में जब शेष गणना पूरी होगी, तो यह राशि निश्चित रूप से और भी अधिक होगी, जो इस बात को रेखांकित करती है कि सांवलिया सेठ के प्रति भक्तों का यह समर्पण अविरल है।