राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में है। स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा-2022 को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बड़ा और अहम फैसला सुनाते हुए नियुक्ति प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत का यह रुख उन हजारों अभ्यर्थियों के लिए किसी झटके से कम नहीं है, जो लंबे समय से अपनी जॉइनिंग का इंतजार कर रहे थे। हाईकोर्ट ने इस मामले में आयोग से जवाब तलब किया है कि आखिर किन परिस्थितियों में परीक्षा संपन्न होने और परिणाम आने के दो साल बाद 'आंसर की' (Answer Key) में बदलाव किया गया।

क्या है पूरा मामला और विवाद की जड़?

यह पूरा मामला स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा की उत्तर कुंजी (Answer Key) में किए गए बदलावों से जुड़ा है। सामान्य तौर पर, किसी भी भर्ती परीक्षा में आंसर की पर आपत्तियां मांगी जाती हैं, उनका निस्तारण होता है, और उसके बाद परिणाम घोषित किया जाता है। लेकिन इस मामले में आरोप है कि परिणाम जारी होने और पूरी प्रक्रिया के अंतिम चरण में पहुंचने के बाद, आयोग ने अचानक उत्तर कुंजी बदल दी।

इस बदलाव के कारण मेरिट सूची में बड़ा उलटफेर हो गया है। जो अभ्यर्थी पहले चयन की सूची में थे, वे अब बाहर हो गए हैं, जबकि कुछ नए अभ्यर्थी सूची में शामिल हो गए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि दो साल का लंबा समय बीत जाने के बाद इस तरह का बदलाव न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि यह उन छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है जिन्होंने अपनी मेहनत से स्थान बनाया था। शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की विसंगतियां छात्रों का भरोसा व्यवस्था से कम करती हैं।

हाईकोर्ट की सख्ती और आयोग की कार्यप्रणाली

राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरपीएससी को जमकर फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि भर्ती प्रक्रिया के बीच में नियमों और उत्तर कुंजी में इस प्रकार का बदलाव स्वीकार्य नहीं है। न्यायधीश समीर जैन की अदालत ने इस मामले में आयोग से विस्तृत जवाब मांगा है कि आखिर इस बदलाव के पीछे क्या तर्क था और क्यों न इस पूरी प्रक्रिया को दोबारा से उचित तरीके से जांचा जाए।

अदालत ने अंतरिम आदेश देते हुए नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी है, जिससे अब फिलहाल चयनित अभ्यर्थियों की काउंसलिंग और पदस्थापन का काम रुक गया है। यह आरपीएससी की कार्यक्षमता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। अजमेर स्थित आरपीएससी मुख्यालय पर अक्सर भर्तियों में देरी और विवादों के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इस बार मामला तकनीकी और प्रशासनिक निर्णय लेने की क्षमता पर है।

अभ्यर्थियों के भविष्य पर संकट के बादल

इस भर्ती में शामिल हुए युवाओं का एक बड़ा वर्ग मानसिक तनाव से गुजर रहा है। दो साल से अधिक का समय एक अभ्यर्थी के जीवन में बहुत महत्व रखता है। कई अभ्यर्थी ऐसे हैं जिनकी आयु सीमा निकल रही है, तो कई ऐसे हैं जिन्होंने इस नौकरी के भरोसे अपने अन्य करियर विकल्पों को छोड़ दिया था।

अधिवक्ताओं का तर्क है कि यदि आयोग हर परीक्षा में परिणाम आने के बाद उत्तर कुंजी बदलता रहेगा, तो भर्ती प्रक्रिया कभी पूरी नहीं हो पाएगी। यह न केवल समय की बर्बादी है, बल्कि सरकारी खजाने पर भी बोझ है। छात्रों का कहना है कि आयोग को विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति बनानी चाहिए जो पेपर सेट करने से पहले ही त्रुटिहीन उत्तर कुंजी सुनिश्चित करे, ताकि बाद में इस तरह की नौबत न आए।

निष्कर्ष

राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। आरपीएससी स्कूल व्याख्याता भर्ती का यह मामला स्पष्ट करता है कि सिस्टम में सुधार की कितनी आवश्यकता है। हाईकोर्ट का हस्तक्षेप उचित है क्योंकि यह न केवल पीड़ित अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की दिशा में एक कदम है, बल्कि आयोग को भी यह संदेश देता है कि भविष्य में प्रशासनिक निर्णयों में अधिक सतर्कता बरती जाए। अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि भर्ती प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ेगी और क्या आयोग अपनी गलती सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा।