राजस्थान में शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे हजारों युवाओं का सब्र अब जवाब देने लगा है। प्रदेश की राजधानी जयपुर में REET (राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा) से जुड़ी मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने अब आमरण अनशन का रास्ता अपना लिया है। कड़ाके की धूप और प्रतिकूल परिस्थितियों में भूख हड़ताल पर बैठे कई अभ्यर्थियों की तबीयत अचानक बिगड़ने की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे प्रशासन और सरकार पर दबाव बढ़ गया है।

आखिर क्यों सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए युवा?

REET भर्ती राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है, जिस पर लाखों परिवारों की उम्मीदें टिकी होती हैं। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की कमी को पूरा करने और युवाओं को रोजगार देने के लिए यह परीक्षा एक बड़ा जरिया है। लेकिन पिछले कुछ समय से भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी और विसंगतियों ने अभ्यर्थियों को हताश कर दिया है।

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियुक्ति की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं। सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट रुख न अपनाए जाने के कारण युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। अपनी मांगों को मनवाने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे इन युवाओं ने अब मजबूरन अनशन का रास्ता चुना है। उनका तर्क है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे पीछे नहीं हटेंगे।

अनशन का बढ़ता असर और गिरती सेहत

आंदोलन स्थल पर स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। लगातार भूखे रहने के कारण कई प्रदर्शनकारियों में कमजोरी, चक्कर आना और ब्लड प्रेशर गिरने जैसी समस्याएं देखी गई हैं। मौके पर मौजूद साथी अभ्यर्थियों और स्थानीय लोगों ने सरकार से अपील की है कि वे इन युवाओं की जान के साथ खिलवाड़ न करें और जल्द से जल्द बातचीत का दौर शुरू करें।

एक प्रदर्शनकारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, "हम अपनी जायज मांगों के लिए लड़ रहे हैं। हम कोई असामाजिक तत्व नहीं हैं, बल्कि वे युवा हैं जिन्होंने सालों तक मेहनत की है। अब जब परिणाम का समय आया है, तो सरकारी उदासीनता ने हमें मौत के मुंह में धकेल दिया है। अगर अनशन के दौरान किसी को कुछ हुआ, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।" स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण मौके पर अफरा-तफरी का माहौल भी देखा गया, जहाँ समय रहते चिकित्सा सहायता न मिलने से स्थिति और बिगड़ सकती है।

प्रशासनिक सुस्ती और बढ़ता राजनीतिक तनाव

इस मामले ने अब धीरे-धीरे तूल पकड़ना शुरू कर दिया है। राज्य की राजनीति में भी इस मुद्दे पर घमासान छिड़ गया है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है और सरकार पर युवाओं के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष का कहना है कि वे मामले की गंभीरता को समझ रहे हैं और प्रक्रिया के अनुसार ही काम किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान में बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं में देरी एक बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है। ऐसे में REET अभ्यर्थियों का यह आंदोलन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। प्रशासन के अधिकारी अब डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुटे हैं और अनशनकारियों से बातचीत करने के लिए दूत भेजे जा रहे हैं, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके। हालांकि, अभी तक कोई ठोस समाधान न निकलने के कारण अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

निष्कर्ष

REET अभ्यर्थियों का यह आंदोलन केवल एक परीक्षा या नियुक्ति का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के युवाओं के भविष्य और उनके भरोसे से जुड़ा हुआ है। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की आवाज सुनना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य होता है। अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों की गिरती तबीयत इस बात का संकेत है कि अब समय वार्ता का नहीं, बल्कि त्वरित निर्णय लेने का है। सरकार को चाहिए कि वह पारदर्शिता के साथ इन युवाओं की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे और भर्ती प्रक्रिया को गति प्रदान करे। उम्मीद है कि जल्द ही कोई बीच का रास्ता निकलेगा, जिससे प्रदेश के हजारों युवाओं के चेहरों पर फिर से मुस्कान आ सकेगी और वे अपने सपनों को पूरा कर सकेंगे।