डिजिटल ठगी का नया केंद्र बना उदयपुर का मावली

राजस्थान के उदयपुर जिले का मावली क्षेत्र इन दिनों साइबर अपराधियों के एक बड़े नेटवर्क के कारण सुर्खियों में है। पुलिस की जांच में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक ही बैंक खाते का इस्तेमाल करके देशभर में 54 साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम दिया गया। इस मामले में सांगवा गांव के एक आरोपी की संलिप्तता सामने आई है, जो फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे ग्रामीण इलाकों के बैंक खातों का इस्तेमाल बड़े शहरों के शातिर अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए कर रहे हैं।

एक खाता, 54 शिकार: कैसे काम करता है यह नेटवर्क

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि अपराधी अक्सर गरीब या कम पढ़े-लिखे लोगों को प्रलोभन देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं। इन खातों को 'म्यूल अकाउंट' कहा जाता है। मावली के इस मामले में भी कुछ ऐसा ही पैटर्न देखने को मिला है। एक ही खाते से 54 अलग-अलग शिकायतों का जुड़ना यह साबित करता है कि यह कोई छिटपुट अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह का काम है। देशभर में दर्ज हुई इन शिकायतों में लोगों को लुभावने ऑफर, केवाईसी अपडेट के नाम पर मैसेज या फिर ऑनलाइन शॉपिंग में छूट का झांसा देकर ठगा गया था। जब पीड़ित ने पैसा ट्रांसफर किया, तो वह राशि इसी एक खाते में जमा हुई और वहां से तुरंत दूसरे खातों में डायवर्ट कर दी गई, जिससे पुलिस के लिए मुख्य अपराधी तक पहुंचना मुश्किल हो गया।

पुलिस की दबिश और आरोपी की फरारगी

जैसे ही देशभर के विभिन्न पुलिस थानों से उदयपुर पुलिस को इस खाते के बारे में इनपुट मिले, जांच का दायरा बढ़ा दिया गया। सांगवा गांव में जब पुलिस ने दबिश दी, तो मुख्य आरोपी वहां से फरार होने में कामयाब रहा। स्थानीय पुलिस का कहना है कि आरोपी ने तकनीकी रूप से खुद को काफी सुरक्षित रखा था और वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा है। फिलहाल, उदयपुर की साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की टीमें आरोपी की तलाश में जुटी हैं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस खाते को खुलवाने के पीछे किसका हाथ था और क्या आरोपी के तार किसी बड़े अंतरराज्यीय साइबर गिरोह से जुड़े हुए हैं।

ग्रामीण इलाकों में बढ़ता साइबर खतरा और सावधानी

राजस्थान के कई ग्रामीण इलाकों में साइबर अपराधियों ने अपना नया ठिकाना बना लिया है। कम जागरूकता का फायदा उठाकर ये अपराधी भोले-भाले युवाओं को अपना मोहरा बनाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक खाता किसी को भी किराए पर देना या अपना ओटीपी (OTP) साझा करना कानूनी अपराध है। यदि आपके खाते का इस्तेमाल गलत कामों में होता है, तो बैंक और पुलिस की कार्रवाई में खाताधारक ही मुख्य आरोपी माना जाता है। मावली की यह घटना एक चेतावनी है कि लोग अपने दस्तावेजों और बैंक खातों को लेकर सतर्क रहें। किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने खाते का एक्सेस न दें, चाहे वह कितना भी बड़ा प्रलोभन क्यों न दे।

निष्कर्ष

मावली का यह मामला साइबर क्राइम की उस भयावह तस्वीर को सामने लाता है, जहां एक साधारण सा बैंक खाता हजारों किलोमीटर दूर बैठे किसी व्यक्ति की गाढ़ी कमाई को पल भर में साफ कर सकता है। पुलिस की जांच जारी है और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश हो पाएगा। आमजन के लिए जरूरी है कि वे डिजिटल लेनदेन में सतर्कता बरतें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत '1930' साइबर हेल्पलाइन नंबर पर दें। सतर्कता ही साइबर ठगी से बचने का सबसे प्रभावी हथियार है।