राजस्थान में रेल पटरियों के पास सेल्फी और वीडियो बनाने का जुनून एक बार फिर एक युवा के लिए काल बनकर सामने आया है। राज्य के एक इलाके में चलती ट्रेन की चपेट में आने से एक युवक का हाथ कटकर अलग हो गया। इस हादसे में युवक गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद जोधपुर के बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया गया है। घटना के बाद सोशल मीडिया पर युवक की तस्वीरें और वीडियो चर्चा का विषय बने हुए हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि मनोरंजन के नाम पर की गई लापरवाही किसी की जिंदगी को पल भर में तहस-नहस कर सकती है।
सोशल मीडिया का जुनून और बढ़ता खतरा
आज के दौर में सोशल मीडिया पर 'लाइक्स' और 'व्यूज' पाने की होड़ युवाओं में तेजी से बढ़ रही है। लोग खतरनाक जगहों, जैसे कि चलती ट्रेन के दरवाजे, रेलवे ट्रैक या ऊंची इमारतों के किनारों पर जाकर फोटो और रील शूट कर रहे हैं। ताजा मामले में भी यही बात सामने आई है कि युवक रेल ट्रैक के आसपास ही मौजूद था और संभवतः सोशल मीडिया के लिए सामग्री जुटाने की कोशिश कर रहा था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि रील बनाने के दौरान व्यक्ति का पूरा ध्यान कैमरे के एंगल पर होता है, जिससे वह अपने आस-पास के खतरों के प्रति पूरी तरह बेखबर हो जाता है। रेलवे प्रशासन ने भी कई बार चेतावनी जारी की है कि ट्रैक के पास वीडियो बनाना न केवल कानूनी रूप से अपराध है, बल्कि यह सीधे तौर पर मौत को दावत देना है।
रेलवे ट्रैक: सुरक्षा के नियमों की अनदेखी
भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार, रेल पटरियों के पास अनाधिकृत प्रवेश करना दंडनीय अपराध है। बावजूद इसके, ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोग शॉर्टकट अपनाने या फिर मनोरंजन के लिए पटरियों पर घूमते रहते हैं। जब ट्रेन अचानक सामने आती है, तो उसकी गति इतनी अधिक होती है कि संभलने का मौका ही नहीं मिलता। इस हादसे में युवक का हाथ कटना यह दर्शाता है कि टक्कर कितनी जोरदार रही होगी। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की चोटों में शरीर से बहुत अधिक रक्त बह जाता है, जिससे मरीज का 'गोल्डन ऑवर' (दुर्घटना के बाद का पहला घंटा) बहुत कीमती होता है। समय रहते जोधपुर रेफर किए जाने के कारण युवक को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिलने की उम्मीद है, लेकिन शरीर का अंग खोना उसके लिए एक जीवनभर का जख्म बन गया है।
गंभीर हालत में जोधपुर रेफर
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची। स्थानीय अस्पताल में डॉक्टरों ने देखा कि स्थिति बेहद नाजुक है और घाव गहरा होने के कारण अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा है। जोधपुर के अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर की टीम पहले से ही सतर्क कर दी गई थी। फिलहाल, युवक की हालत स्थिर होने की कोशिश की जा रही है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार आगामी 48 घंटे उसके स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और स्थानीय लोग अब उन युवाओं को चेतावनी दे रहे हैं जो पटरियों के आसपास रील बनाते देखे जाते हैं।
निष्कर्ष
यह दुखद घटना हम सभी के लिए एक सबक है। सोशल मीडिया की चकाचौंध में अपनी जान को जोखिम में डालना कहीं से भी समझदारी नहीं है। एक छोटी सी रील या फोटो आपकी जिंदगी से कीमती नहीं हो सकती। रेलवे प्रशासन और स्थानीय पुलिस को भी चाहिए कि वे ट्रैक के आसपास निगरानी बढ़ाएं और युवाओं को जागरूक करें। अभिभावकों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने बच्चों को समझाएं कि डिजिटल दुनिया की वाहवाही से बढ़कर शारीरिक सुरक्षा है। हमें यह समझना होगा कि पटरियां ट्रेनों के लिए हैं, किसी के मनोरंजन के लिए नहीं। उम्मीद है कि युवक जल्द स्वस्थ होगा, लेकिन यह हादसा समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
