जयपुर के ऐतिहासिक परकोटा क्षेत्र में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहां एक पांच मंजिला इमारत के मुख्य पिलर में अचानक दरारें आने से हड़कंप मच गया। इमारत की नींव हिलती देख निवासियों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया और आनन-फानन में 10 परिवारों को अपने आशियाने को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा। इस घटना ने पूरे शहर में पुराने और जर्जर हो चुके निर्माणों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटनास्थल पर पहुंचे स्थानीय लोगों और प्रशासन ने इसे बड़ी लापरवाही का नतीजा बताया है। गनीमत यह रही कि पिलर के चटकने की आवाज समय रहते सुनी गई, जिससे बड़ा जानी नुकसान होने से बच गया। वर्तमान में इमारत को खाली करवाकर प्रशासन ने क्षेत्र की घेराबंदी कर दी है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर पांच मंजिला इमारत के पिलर में इतनी गंभीर दरारें आईं कैसे और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

बेतरतीब निर्माण का दंश झेलता परकोटा

राजस्थान की राजधानी जयपुर का परकोटा क्षेत्र अपनी स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। लेकिन बीते कुछ दशकों में यहां व्यावसायिक लाभ कमाने की होड़ में पुरानी हवेलियों और ढांचों के साथ जमकर छेड़छाड़ की गई है। पुरानी नींवों पर आज पांच से छह मंजिला इमारतें खड़ी कर दी गई हैं, जबकि उन निर्माणों की क्षमता इतनी भार सहन करने की बिल्कुल नहीं थी।

यह घटना कोई इकलौती नहीं है। संकरी गलियां और पुराने ढांचे, जिन पर नई ईंटों और कंक्रीट का बोझ लादा गया है, वे समय के साथ कमजोर हो रहे हैं। परकोटे के भीतर आज भी कई ऐसी इमारतें मौजूद हैं जो कभी भी ताश के पत्तों की तरह ढह सकती हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि पुरानी संरचनाओं में बिना किसी स्ट्रक्चरल इंजीनियर की सलाह के बदलाव किए जा रहे हैं, जो भविष्य में किसी बड़ी आपदा को न्योता दे रहे हैं।

सिस्टम की अनदेखी और बढ़ता जोखिम

इस पूरी स्थिति के लिए स्थानीय राजनीति और नगर निगम की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शहर के बीचों-बीच चल रहे अवैध निर्माणों पर लगाम लगाने के बजाय, संबंधित विभाग अक्सर चुप्पी साधे रखते हैं। जब कोई हादसा हो जाता है, तब प्रशासन की नींद खुलती है और खानापूर्ति के लिए नोटिस जारी किए जाते हैं।

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विशेषज्ञों का मानना है कि परकोटा क्षेत्र के लिए एक विशेष स्ट्रक्चरल ऑडिट की आवश्यकता है। शहर के पुराने घरों की मजबूती की जांच करना अब अनिवार्य हो गया है। लेकिन निगम प्रशासन इस दिशा में उदासीन नजर आता है। क्या हमें किसी बड़े हादसे का इंतजार है या प्रशासन समय रहते इन जर्जर इमारतों को चिन्हित कर उन्हें खाली करवाएगा? यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि यदि अब भी कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।

विरासत बनाम आधुनिकता की जंग

जयपुर का परकोटा न केवल लोगों का घर है, बल्कि यह पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद, इन क्षेत्रों के संरक्षण की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। लेकिन आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम अपनी विरासत को ही खोखला कर रहे हैं।

एक तरफ हम हेरिटेज सिटी का प्रचार करते हैं, वहीं दूसरी तरफ व्यावसायिक स्वार्थ के चलते पुरानी इमारतों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। पांच मंजिला इमारत का पिलर क्षतिग्रस्त होना यह साबित करता है कि जमीन के नीचे का ढांचा और पुरानी नींवें अब और भार सहने की स्थिति में नहीं हैं। यदि परकोटे के स्वरूप और लोगों की सुरक्षा को बचाना है, तो भविष्य के निर्माणों पर सख्त नियंत्रण लागू करना ही एकमात्र रास्ता है।

निष्कर्ष

जयपुर परकोटा में हुई यह घटना केवल एक इमारत के गिरने का खतरा नहीं है, बल्कि यह उस पूरे सिस्टम की विफलता है जो इन अवैध और खतरनाक निर्माणों को पनपने देता है। 10 परिवारों का बेघर होना एक मानवीय त्रासदी है, जिसके लिए प्रशासनिक लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। समय की मांग है कि प्रशासन पूरे परकोटा क्षेत्र में एक विस्तृत सर्वे कराए, जर्जर इमारतों को चिन्हित करे और जो निर्माण नियम विरुद्ध हैं, उन पर सख्त कार्रवाई करे। शहर की सुरक्षा और इसकी ऐतिहासिक विरासत को बचाने के लिए अब कठोर निर्णय लेने का समय आ गया है, अन्यथा ऐसी घटनाएं भविष्य में और भी भयावह रूप ले सकती हैं।