भारत में इन दिनों मौसम का मिजाज दो विपरीत छोरों पर खड़ा नजर आ रहा है। देश के एक बड़े भूभाग ने लगातार पंद्रह दिनों तक भीषण गर्मी की तपिश को सहा है, लेकिन गुरुवार का दिन थोड़ी राहत लेकर आया। मौसम की इस अजीबोगरीब स्थिति ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। जहाँ एक तरफ राजस्थान और महाराष्ट्र के कुछ हिस्से झुलसा देने वाली लू की चपेट में हैं, वहीं दूसरी तरफ उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के कई राज्यों में आंधी, तूफान और ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई है। मौसम की इन प्रतिकूल स्थितियों के चलते अब तक कुल 29 लोगों की जान जा चुकी है। यह स्थिति न केवल चुनौतीपूर्ण है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों की ओर भी इशारा करती है।

भीषण गर्मी: राजस्थान और विदर्भ का पारा 44 डिग्री के पार

देश का एक बड़ा हिस्सा लंबे समय से गर्मी की मार झेल रहा है। हालांकि, गुरुवार को उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि के कारण पारे में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिली। लेकिन, विदर्भ और राजस्थान जैसे इलाकों में गर्मी का तांडव जारी है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, विदर्भ का चंद्रपुर इलाका सबसे ज्यादा गर्म रहा, जहाँ गुरुवार को अधिकतम तापमान 44.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा, राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर, महाराष्ट्र के अमरावती और आंध्र प्रदेश के रेन्टाचिंताला में भी तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार कर गया। गर्मी की यह प्रचंड स्थिति स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है। लू के दौरान डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और थकान जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहता है, तो यह मानव शरीर के लिए अत्यधिक तनावपूर्ण हो जाता है।

आंधी-तूफान और वज्रपात: 29 जिंदगियां लील गया खराब मौसम

गर्मी के बीच सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में अचानक आई आंधी और बारिश ने जान-माल का भारी नुकसान किया है। बेंगलुरु में भारी बारिश और उसके साथ हुई घटनाओं में 10 लोगों की मौत की दुखद खबर सामने आई है। वहीं, उत्तर प्रदेश में आंधी और आकाशीय बिजली गिरने (Lightning Strike) की घटनाओं ने 13 लोगों की जान ले ली, जिसमें सुल्तानपुर जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा। बिहार में भी इसी तरह की घटनाओं में 5 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई है।

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले की बनी तहसील में एक घर पर बिजली गिरने की घटना ने भी प्रशासन को अलर्ट मोड पर डाल दिया है। बिजली गिरने की ये घटनाएं बताती हैं कि वातावरण में अस्थिरता कितनी अधिक बढ़ गई है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो, जब गर्म हवाएं ठंडी हवाओं के साथ मिलती हैं और वायुमंडल में नमी अधिक होती है, तो 'क्यूम्यलोनिम्बस' (Cumulonimbus) नामक बादल बनते हैं, जो भारी बारिश, ओले और बिजली के लिए जिम्मेदार होते हैं।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान और अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो हफ्तों तक गर्मी का असर थोड़ा कम रहने की उम्मीद है, लेकिन अभी राहत पूरी तरह नहीं मिली है। विभाग ने चेतावनी जारी की है कि विदर्भ में 6 मई तक और पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में 2-3 मई तक लू चलने की आशंका बनी हुई है।

इसके साथ ही, ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है। शुक्रवार को ओडिशा, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, हिमालय से सटे पश्चिम बंगाल और दक्षिण कर्नाटक में भारी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इन क्षेत्रों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। यह स्थिति फसलों और कच्चे घरों के लिए अत्यंत खतरनाक हो सकती है।

बदलते मौसम और सुरक्षा के उपाय

इस बदलते मौसम के दौर में सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है। लू से बचने के लिए हाइड्रेटेड रहना (पर्याप्त पानी पीना), दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच घर से बाहर न निकलना और सूती कपड़े पहनना सबसे प्रभावी उपाय है।

वहीं, आंधी और बिजली गिरने के दौरान भी प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए। यदि आप बाहर हैं और आसमान में बिजली कड़क रही है, तो किसी भी बड़े पेड़ या बिजली के खंभे के नीचे न खड़े हों। खुले मैदान में लेटने के बजाय, अपने पैरों को सिकोड़कर झुक जाना (Crouching position) एक सुरक्षित तरीका माना जाता है। बिजली के उपकरणों को अनप्लग करना और धातु की वस्तुओं से दूर रहना भी जान बचाने में मदद कर सकता है।

निष्कर्ष

भारत में मौसम की यह दोहरी मार – एक तरफ भीषण लू और दूसरी तरफ विनाशकारी तूफान – हमारे बदलते जलवायु चक्र का प्रमाण है। जहाँ एक तरफ हमें गर्मी से निपटने के लिए संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और जल संरक्षण की आवश्यकता है, वहीं दूसरी तरफ आंधी और बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर पूर्व-चेतावनी प्रणालियों और जन-जागरूकता की सख्त जरूरत है। प्रशासन और आम नागरिकों को मिलकर इस चुनौतीपूर्ण समय का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।